दशहरा (विजयदशमी) हिन्दुओं का एक
प्रमुख त्योहार है, जो
पूरे भारत में प्रत्येक वर्ष श्रद्धा भावना से, हर्षोल्लास के
साथ मनाया जाता है
। हिंदू पचांग के अनुसार आश्विन मास की
शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा का त्योहार मनाया जाता है, धार्मिक कथाओं के अनुसार पुरूषोत्तम भगवान राम
ने इसी दिन लंकापति रावण का वध
किया था, इसीलिए ही
दशहरा को बुराई पर
अच्छाई की जीत का
प्रतीक माना जाता है.
दशहरा का यह पर्व यही सन्देश देता है कि सत्य की हमेशा विजय होती है। अहंकार और झूठ का
अंत हमेशा बुरा ही
होता है, इसी कारण दशहरा का पर्व अवगुणों को त्याग कर श्रेष्ठ गुणों को अपनाने के
लिए प्रेरित करता है।
दशहरा (विजयदशमी) का महत्व
दशहरे को भगवान श्री राम की
असत्य पर विजय के
रूप में जाना जाता है, इस दिन
भगवान श्री राम ने
रावण का वध वध
किया था, यह पर्व असत्य पर सत्य की विजय का
प्रतीक है, वही इस
दिन मां दुर्गा ने
भी महिषासुर का संघार किया था और
इंद्र आदि देवताओं को
भय मुक्त किया था,
इसलिए दशहरे को बहुत शुभ और पुण्य तिथि के रूप
में माना जाता है,
इस दिन जो भी
नया कार्य प्रारंभ करते हैं उस उस
कार्य में विजय प्राप्त होती है, विजयदशमी पर वाहन खरीदना, नया कार्य प्रारंभ करना , मकान, प्रॉपर्टी आदि खरीदना या
ग्रह प्रवेश आदि करना बहुत शुभ माना जाता है।
विजयदशमी तिथि का प्रारंभ
अश्विन मास शुक्ल पक्ष दशमी तिथि शुरू – 14 अक्टूबर 2021 को
शाम 6 बजकर 52 मिनट से
अश्विन मास शुक्ल पक्ष तिथि समाप्त – 15 अक्टूबर 2021 शाम 6 बजकर 2 मिनट पर
दशहरा (विजयदशमी) का पूजा मुहूर्त
दशहरा पूजन का
प्रथम शुभ मुहूर्त – 15 अक्टूबर को प्रातःकाल 09 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 46 मिनट तक
दशहरा पूजन का
द्वितीय शुभ मुहूर्त – 15 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 02 मिनट से 02 बजकर 48 मिनट तक
विजयदशमी पूजन विधि
विजयदशमी पूजा के लिए सर्वप्रथम प्रात: काल उठकर परिवार के सभी
सदस्य स्नान कर स्वच्छ वस्त्र अथवा नवीन वस्त्र धारण करें. और उसके बाद
जिस स्थान पर पूजा करनी है, उस
पूजा वाले स्थान को
गाय के गोबर से
लिपकर पूजा के स्थान को गंगाजल से
शुद्ध करके आटे से
वेदी बनाएं, तत्पश्चात गाय
के गोबर से दस
गोले बनाए, और दो-दो
गोले वेदी के चारों कोनों पर रख
दें और बाकी दो
गोले वेदी के मध्य में रखें, अब
इन गोबर के गोले में नवरात्रि के
दिन बोये गए जौ
तोड़कर लगाएं, और उसके बाद पूजा वेदी वाले स्थान पर
अपने इष्ट देवी देवताओं को फल, फूल,
खील, बताशे और मिष्ठान शमी के पत्ते आदि अर्पित करें. और धूप दीप
जला कर के भगवान गणेश, मां दुर्गा, मां सरस्वती, भगवान राम और हनुमान जी पूजा की
करें। कुछ स्थानों पर
इस दिन अस्त्र-शस्त्र (हथियार) की पूजा भी की जाती है,जो लोग
अस्त्र-शस्त्र की पूजा करते हैं वह
भी सभी शस्त्रों को
पूजा के लिए निकाल कर उन सब
शस्त्रों पूजा वेदी के
पास रखें और उन
सभी शस्त्रों पर गंगाजल छिड़कर उन्हें पवित्र करें, बाद सभी
शस्त्रों पर हल्दी या
कुमकुम तथा चंदन आदि
से तिलक करें और
पुष्प अर्पित कर कलावा आदि बांधकर शस्त्र पूजा करें। उसके बाद भगवान की
आरती करें और भगवान को भोग लगाएं, अब पूजा संपूर्ण होने के पश्चात अपने माता-पिता तथा पूजा स्थल पर उपस्थित सभी
बड़े बुजुर्गों के पैर
छू कर सबका अशिर्वाद प्राप्त करें।
ज्योतिष की दृष्टि के अनुसार दशहरे पर इन उपाय को करके आप अपने जीवन में ओर भी अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
1-: दशहरे पर सुंदरकांड अवश्य करें इससे सभी रोग और
मानसिक परेशानियां दूर हो
जाती है।
2-: दशहरे पर रावण दहन के बाद
गुप्त दान करना बेहद शुभ माना गया
है।
3-: दशहरे के दिन
नीलकंठ पक्षी के दर्शन करें. ऐसा करना बहुत शुभ होता है. नीलकंठ देखने से पूरे साल
जिंदगी खुशहाल रहती है।
4-: दशहरे के दिन
शमी के पेड़ की
पूजा करें. इससे घर
में बरकत बनी रहेगी. वहीं शमी का
पेड़ लगाने के लिए
दशहरे के दिन को
सबसे ज्यादा शुभ
माना गया है क्योंकि इसी दिन कुबेर ने राजा रघु
को सोने की मुद्राएं देने के लिए
शमी के पेड़ के
पत्तों को सोने का
बना दिया था. इसीलिए दशहरे के दिन
सोने की पत्ती खरीदने का भी अपना विशेष महत्व हैं।
5-: दशहरे के दिन
एक नारियल सवा मीटर पीले वस्त्र में
लपेटकर एक जोड़ा जनेऊ, सवा पाव मिष्ठान्न के साथ आस-पास
के किसी भी राम
मंदिर में चढ़ा दें।
6-: दशहरे के दिन
एक फिटकरी के टुकड़े को सभी घर
के सदस्यों पर से
वार कर उसे छत
या सुनसार जगह पर
खुद से पीछे की
ओर अपने ईष्टदेव का
ध्यान करते हुए फेंक दें। माना जाता है कि ऐसा
करने से घर की
हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का नाश
होता है।
7-: दशहरा पूजन के
बाद बहन, बुआ, बेटी द्वारा कान के
पीछे जौ रखने से
भी भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है,
और ग्रह की दृष्टि से बुद्ध ग्रह का विशेष फल
प्राप्त होता है।
8-: ऋण उतारने के लिए एक नारियल पर चमेली का
तेल मिले सिन्दूर से
स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। लड्डू अथवा गुड़-चना के
भोग के साथ हनुमानजी के मंदिर में
जाकर उनके चरणों में
अर्पित करके ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ
करें। इससे ऋण
उतरने तत्काल लाभ प्राप्त होगा।
9-: दशहरे के दिन
थोड़ी दूरी की ही
सही लेकिन यात्रा जरूर करें. इससे पूरे साल यात्रा करने में बाधा नहीं आती है।
10-: दशहरे के दिन
मां दुर्गा को स्नान कराने के बाद
लाल रंग के रुमाल से मां के
चरणों को साफ करें और उस लालन के रुमाल को
अपनी तिजोरी या पैसे रखने वाली जगह
पर रखें , तो पूरे साल मां के
आशीर्वाद से घर में
संपन्नता रहेगी. याद
रखें कि कपड़ा या
रुमाल लाल रंग का
ही होना चाहिए।
नोट-: दशहरे पर
कालसर्प दोष निवारण हेतु दशहरे के दिन
एक जटा वाला नारियल ,100 ग्राम काले तिल
, 100 ग्राम जौ, सौ
ग्राम उड़द, सौ ग्राम कच्चा कोयला, व
5 बादाम इन सब को
काले कपड़े में बांधकर तथा अपने ऊपर
से सात बार उतार कर बहते जल
में प्रवाहित करें।